
देहरादून। देश की सीमाओं पर बसे गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उनकी सामरिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्ता से युवाओं को परिचित कराने के उद्देश्य से संचालित ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2026’ के अंतर्गत रविवार को एक विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की गई।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्न्द्दी ने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 सीमावर्ती गांवों का भ्रमण कर लौटे 400 से अधिक चयनित युवाओं से सीधा संवाद किया और उनके अनुभवों को आत्मीयता से सुना।
‘माइ भारत’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से आयोजित इस राष्ट्रव्यापी पहल में तीन लाख से अधिक युवाओं ने प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भाग लिया था। इनमें से देशभर के 403 युवाओं का चयन सीमांत गांवों के अध्ययन भ्रमण के लिए किया गया। उत्तराखंड से 15 तथा देहरादून जिले से छह युवा—शिवांग रमोला, नेहा रेवंकर, पलक पांथरी, आकांक्षा बिष्ट, संदीप नेगी एवं वरदान—इस कार्यक्रम का हिस्सा बने।
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती गांवों को अब देश का अंतिम नहीं, बल्कि “भारत का पहला गांव” माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रमण से दृष्टिकोण व्यापक होता है और मन के भ्रम दूर होते हैं। सीमांत क्षेत्रों की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं और वहां के लोगों की राष्ट्रभक्ति पूरे देश को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के सूत्र में जोड़ती है। उन्होंने युवाओं से अपने अनुभव अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और सीमांत पर्यटन को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
3 जून से 30 जून तक दो चरणों में आयोजित इस भ्रमण के दौरान युवाओं ने सीमांत गांवों में हो रहे विकास कार्यों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने पक्की सड़कों, बिजली, पेयजल, सोलर लाइट, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा डिजिटल बैंकिंग जैसी सुविधाओं के विस्तार को करीब से देखा। युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सीमांत क्षेत्रों के लोगों का आत्मीय आतिथ्य, राष्ट्र के प्रति समर्पण और सकारात्मक जीवन दृष्टि उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रही। उनके अनुसार यह यात्रा केवल शैक्षणिक भ्रमण नहीं, बल्कि जीवन को नए नजरिए से समझने का अवसर बनी।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), देहरादून में आयोजित वर्चुअल संवाद कार्यक्रम में युवाओं एवं अधिकारियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम में परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, राज्य निदेशक राहुल डबराल, उप निदेशक मोनिका नांदल, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय सहित ‘माइ भारत’ से जुड़े अनेक युवा एवं अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने प्रधानमंत्री की इस पहल को युवाओं में राष्ट्रीय चेतना और सीमांत क्षेत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण अभियान बताया।