11
Jul
अगर भारत की कंपनियाँ हर घंटे के हिसाब से कार्बन-फ्री बिजली खरीदने लगें, तो देश 2030 तक 52 गीगावॉट तक चौबीस घंटे मिलने वाली स्वच्छ बिजली जोड़ सकता है। यह भारत की कुल अनुमानित बिजली मांग का 5% हिस्सा होगा — और उसमें से 70% पूरी तरह स्वच्छ स्रोतों से हासिल किया जा सकेगा। इस बदलाव से ग्रिड ऑपरेटरों को हर साल क़रीब 9 हज़ार करोड़ रुपये की बचत हो सकती है, और साथ ही कार्बन एमिशन में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। यह विश्लेषण जलवायु डेटा संस्था TransitionZero ने किया है, जिसके मुताबिक अगर कंपनियाँ सिर्फ सालाना…
