नई दिल्ली। इंडिया गठबंधन द्वारा दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ महारैली में देशभर से उमड़े लाखों लोगों के जनसैलाब ने राजधानी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी। देश के कोने-कोने से पहुंचे कांग्रेस एवं इंडिया गठबंधन के नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की भारी भागीदारी ने इस रैली को लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा के मुद्दे पर एक बड़े राजनीतिक प्रदर्शन का स्वरूप दिया।

रैली को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है और जिस संवैधानिक संस्था की जिम्मेदारी देश के लोकतंत्र तथा मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है, उसी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में वोट चोरी का मुद्दा सामने आने के बाद से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने जवाब देने की चुनौती खड़ी हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के बजाय सवालों से बचने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में जनता का वोट उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इस ताकत के साथ किसी भी प्रकार की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस महारैली को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के नेता तेजस्वी यादव, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती तथा देश के दिग्गज वामपंथी नेताओं ने भी संबोधित किया। विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं की एक मंच पर उपस्थिति ने इंडिया गठबंधन की एकजुटता और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर साझा चिंता को प्रदर्शित किया।
सभी प्रमुख वक्ताओं ने अपने संबोधनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। नेताओं ने एक स्वर में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा इस्तीफा देने की मांग दोहराई। वक्ताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद है और उसकी निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब देना आवश्यक है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और संविधान की रक्षा का मुद्दा उठाया, वहीं ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने भी मतदाताओं के अधिकारों तथा चुनावी पारदर्शिता को लेकर अपनी बात रखी। फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और वामपंथी नेताओं ने भी विपक्षी एकजुटता के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।
राहुल गांधी ने रैली में उमड़े जनसैलाब की ओर संकेत करते हुए कहा कि देश की जनता अब अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी है और वह अपने वोट की ताकत को कमजोर नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इस लड़ाई को देश के प्रत्येक नागरिक के मताधिकार, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे भी मजबूती से जारी रखेंगे।
रामलीला मैदान में उमड़ी भारी भीड़ और विपक्ष के शीर्ष नेताओं की सामूहिक भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि वोट की स्वतंत्रता, चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही का सवाल अब विपक्ष के साझा राजनीतिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बन चुका है। रैली के माध्यम से इंडिया गठबंधन ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के समक्ष अपने सवालों का जवाब देने तथा चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग रखी।
रैली का प्रमुख संदेश यही रहा कि लोकतंत्र में मतदाता का वोट सर्वोपरि है और उसकी स्वतंत्रता, निष्पक्षता तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना निर्वाचन व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
