देहरादून में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर गूंजे श्रमिक अधिकारों के स्वर, सीटू की रैली और सभाओं में उठीं अहम मांगें

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देहरादून। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर देहरादून जिले के विभिन्न स्थानों पर श्रमिक संगठनों द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान सीटू (CITU) ने अलग-अलग स्थानों पर झंडारोहण के साथ शहर के मुख्य केंद्र में रैली निकालकर श्रमिकों के अधिकारों की आवाज बुलंद की। कार्यक्रमों में वक्ताओं ने श्रमिकों की वर्तमान स्थिति, वेतन विसंगतियों और श्रम कानूनों में हो रहे बदलावों पर विस्तार से चर्चा की।

जिला अध्यक्ष लेखराज ने अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा और उधम सिंह नगर सहित देशभर में श्रमिक अपने अधिकारों के लिए स्वतः स्फूर्त आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये करने की मांग उठाते हुए कहा कि वर्तमान मजदूरी में जीवनयापन कठिन हो गया है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि श्रमिक 1868 से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने चिंता जताई कि मजदूरी भुगतान अधिनियम, न्यूनतम वेतन अधिनियम, बोनस और ग्रेच्युटी जैसे महत्वपूर्ण कानूनों को समाप्त किया जा रहा है, जिससे श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर संकट गहरा रहा है। उन्होंने नई श्रम संहिताओं को रोककर पुराने कानूनों को बहाल करने की मांग की।

इस अवसर पर सीटू के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र सिंह नेगी, ऐटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष शिव प्रसाद देवली, एसएफआई के नितिन मेलठा सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने और कर्मचारियों को विभागीय दर्जा देने की मांग उठाई, साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।

मई दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए सीपीआईएम के राज्य सचिव राजेंद्र पुरोहित ने बताया कि यह दिवस अमेरिका के शिकागो में हुए ‘हेमार्केट अफेयर’ से जुड़ा है, जहां 8 घंटे के कार्यदिवस की मांग को लेकर हुए आंदोलन में कई श्रमिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनकी स्मृति में ही 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है, जो श्रमिक एकता और संघर्ष का प्रतीक है।

सीटू राज्य कोषाध्यक्ष मनमोहन रौतेला ने कहा कि वर्ष 2026 में भी श्रमिक वर्ग अस्थायी रोजगार, नौकरी की असुरक्षा, बढ़ती महंगाई और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने श्रमिकों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और संगठित होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

मजदूर दिवस के अवसर पर लांघा रोड स्थित टाल ब्रॉस फैक्ट्री, उदिया बाग चाय बागान, डाकपत्थर, हथियारी पावर हाउस तथा निर्माणाधीन लखवाड़-ब्यासि जल विद्युत परियोजना सहित विभिन्न स्थानों पर झंडारोहण और सभाएं आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रमिकों ने भाग लेकर अपने अधिकारों के प्रति एकजुटता का संदेश दिया।

By Jagriti Gusain

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