04
Jan
“बाक़ी सब कुछ प्रतीक्षा कर सकता है, लेकिन ईश्वर की खोज प्रतीक्षा नहीं कर सकती।” इस सरल किंतु गहन स्मरण के साथ परमहंस योगानंद ने मानवता को जीवन के केंद्र में आत्म-साक्षात्कार की खोज रखने का आह्वान किया। जैसे-जैसे संसार उनकी 133वीं जयंती का स्मरण करता है, उनका जीवन और शिक्षाएँ संस्कृतियों, आस्थाओं और पीढ़ियों के पार गूंजती रहती हैं—शांति, स्पष्टता और दिव्य प्रेम का कालातीत संदेश देते हुए। 5 जनवरी 1893 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मे परमहंस योगानंद में बचपन से ही आध्यात्मिक सत्य की तीव्र प्यास थी। यही आकांक्षा उन्हें उनके पूज्य गुरु, स्वामी श्री युक्तेश्वर…
