उत्तराखंड। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदले जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ढोल पीट-पीटकर केवल नाम बदलने का प्रचार कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर गरीबों और ग्रामीणों के लिए कोई नई ठोस योजना नहीं ला रही है।
श्री गोदियाल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें कांग्रेस पर नाम का विरोध करने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी को किसी नाम से आपत्ति नहीं है, बल्कि भाजपा द्वारा केवल नाम बदलने और रोजगार गारंटी जैसी ऐतिहासिक योजना को धार्मिक रंग देने की राजनीति पर ऐतराज है।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार सच में गरीबों के हित में काम करना चाहती तो मनरेगा जैसी कोई नई और बेहतर योजना लेकर आती। लेकिन भाजपा सरकार 12 वर्षों की उपलब्धियों के नाम पर पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा देश के करोड़ों लोगों के लिए रोजगार का कानूनी अधिकार है। इसका नाम बदलना रोजगार अधिकार कानून को कमजोर करने और भारत के सबसे महत्वपूर्ण कल्याणकारी कानून से महात्मा गांधी के नाम और मूल्यों को मिटाने की सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। जिस योजना को भाजपा कांग्रेस की विफलता का स्मारक बता रही है, उसी योजना का नाम बदलकर श्रेय लेने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह राज्य के लिए शर्मनाक है कि जिस मनरेगा योजना को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने गरीबों के लिए बनाया था, उसी योजना का पैसा भाजपा के एक विधायक द्वारा वर्षों तक हड़पा गया। यह भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, जिस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पार्टी की ओर से जवाब देना चाहिए।
श्री गोदियाल ने कहा कि मनरेगा कानून “हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो” के संघर्ष से पैदा हुआ था। इस कानून ने ग्रामीण भारत को काम मांगने का कानूनी अधिकार दिया और 100 दिन के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की। भाजपा-आरएसएस की यह कोशिश अधिकार आधारित कल्याणकारी व्यवस्था को खत्म कर उसे केंद्र नियंत्रित चैरिटी में बदलने की साजिश है।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और गरीबों के प्रति राज्य की नैतिक जिम्मेदारी के प्रतीक थे। रोजगार गारंटी कानून से गांधीजी का नाम हटाना भाजपा-आरएसएस की गांधी विरोधी सोच को दर्शाता है और यह लंबे समय से चली आ रही बेचैनी और अविश्वास का प्रमाण है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार के समय यह सुनिश्चित किया गया था कि मजदूरी की मुख्य जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी, जिससे मनरेगा एक सच्ची राष्ट्रीय रोजगार गारंटी बनी। लेकिन भाजपा सरकार द्वारा लाया जा रहा नया बिल इस जिम्मेदारी को समाप्त करता है। यह कानून काम के कानूनी अधिकार को खत्म कर मांग-आधारित योजना को एक ऐसी केंद्र नियंत्रित योजना में बदल देता है, जिसमें न तो रोजगार की गारंटी है और न ही समय पर काम मिलने का भरोसा।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस योजना का वित्तीय बोझ राज्यों पर डाल रही है, आवंटन पर सीमा लगा रही है और मांग-आधारित कार्यक्रम की बुनियाद को कमजोर कर रही है। इससे संघीय ढांचा कमजोर होगा और राज्यों को वित्तीय दबाव में काम की मांग दबाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
