देहरादून/नई दिल्ली। प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड में जल संसाधन विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं और कार्यों की प्रगति की जानकारी साझा की।
महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप उत्तराखंड के नागरिकों को स्वच्छ एवं सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने, कृषि योग्य भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने, भूजल रिचार्ज, जल संरक्षण एवं पर्यटन सहित जल संसाधन विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में उत्तराखंड में 3,142 लिफ्ट नहरें एवं 1,774 नलकूप संचालित हैं। इनसे लगभग 4,24,200 हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की क्षमता है।
महाराज ने बताया कि देहरादून एवं आसपास के क्षेत्रों की वर्ष 2051 तक अनुमानित लगभग 11 लाख आबादी को प्रतिदिन 150 मिलियन लीटर सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए गंगा की सहायक सोंग नदी पर देहरादून से करीब 12 किलोमीटर दूरी पर 133 मीटर ऊंचे सोंग बांध का निर्माण प्रस्तावित है। इससे लगभग 3.65 किलोमीटर लंबी झील का निर्माण होगा और परियोजना को नवंबर 2029 तक पूरा किए जाने का प्रस्ताव है।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी एवं आसपास के क्षेत्रों की वर्ष 2051 तक अनुमानित लगभग 10.65 लाख आबादी को प्रतिदिन 117 मिलियन लीटर सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने तथा नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और उत्तर प्रदेश के बरेली एवं रामपुर जिलों के लगभग 57,065 हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गौला नदी पर बांध निर्माण की योजना प्रस्तावित है। इसकी जल भंडारण क्षमता 208.60 मिलियन घन मीटर बताई गई है तथा परियोजना को जून 2029 तक पूरा करने का प्रस्ताव है।
मंत्री ने बताया कि राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण एवं आसपास के गांवों में पेयजल की सुनिश्चित आपूर्ति के लिए रामगंगा नदी पर गैरसैंण बांध के निर्माण का भी प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त अन्य आबादी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई बांध एवं बैराज परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
महाराज ने कहा कि कैच द रेन कार्यक्रम के अंतर्गत प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, जल संचय एवं स्रोत संवर्धन की दिशा में राज्य में विशेष अभियान चलाया गया है। जल संचय संरचनाओं, चाल-खाल, चेक डैम एवं रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सहित कुल 4,998 संरचनाओं में से 3,980 का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि शेष 1,016 संरचनाओं का निर्माण कार्य जारी ह।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश में जल संसाधनों का प्रभावी एवं दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।