पैठाणी,पौड़ी गढ़वाल। राठ क्षेत्र के विकासखंड थलीसैंण की पट्टी कन्डारस्यूं के ग्राम कोठी में स्वर्गीय सीताराम गोदियाल की धर्मपत्नी स्वर्गीय पूर्णा देवी के मासिक पिंडदान के अवसर पर उनके चारों पुत्रों देवी प्रसाद गोदियाल, जगदंबा प्रसाद गोदियाल, पुष्पानन्द गोदियाल एवं चक्रधर प्रसाद गोदियाल ने गांव के जय सिद्धबली हनुमान मंदिर परिसर में बेलपत्री का समलौण पौधा रोपकर अपनी दिवंगत माता को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
पहाड़ की लोकपरंपरा में प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी आस्था,संस्कार और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में पिंडदान जैसे पुण्य अवसर पर पौधरोपण करना पूर्वजों की स्मृति को प्रकृति के साथ जोड़ने की एक सुंदर और अनुकरणीय पहल है। यह पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए मां की स्मृति और मातृभूमि से जुड़े रिश्ते का जीवंत प्रतीक बनेगा।
इस अवसर पर स्वर्गीय पूर्णा देवी के सबसे छोटे पुत्र चक्रधर प्रसाद गोदियाल ने कहा कि आज परिवार के अधिकांश सदस्य रोजगार एवं आजीविका के लिए देहरादून जैसे शहरों में रहते हैं, लेकिन जिस मातृभूमि में उनका बचपन बीता, जहां उन्होंने पढ़ना-लिखना और खेलना सीखा,उसी मिट्टी और गांव से आज भी उन्हें जीवन का आशीर्वाद मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मां की स्मृति में समलौण पौधा रोपना केवल एक पौधा लगाना नहीं, बल्कि अपनी जड़ों,अपनी मिट्टी और अपनी पहाड़ी संस्कृति को प्रणाम करना है।
उन्होंने गांव में पर्यावरण संरक्षण और संस्कृति के संरक्षण के लिए सक्रिय समलौण संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए ₹500 की नगद राशि प्रोत्साहन स्वरूप भेंट की।
समलौण पहाड़ की परंपरा को बचाने का संकल्प
समलौण एक खूबसूरत गढ़वाली शब्द ही नहीं बल्कि प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को जोड़ने वाली एक विचारधारा है। संस्था के संस्थापक वीरेन्द्रदत्त गोदियाल के नेतृत्व में समलौण संस्था विगत कई वर्षों से पौधरोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ गढ़वाली खान-पान, लोकसंस्कृति, पारंपरिक रीति रिवाज,त्योहारों, शिक्षा और पहाड़ी जीवनशैली के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
समलौण संस्था का यह प्रयास पहाड़ की उस पुरातन सोच को जीवित करता है, जिसमें जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन के प्रत्येक संस्कार को प्रकृति से जोड़कर देखा जाता है। यहां लगाया गया प्रत्येक पौधा केवल हरियाली नहीं बढ़ाता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश भी देता है।पौधे की व्यवस्था कृष्ण बल्लभ गोदियाल ने की तथा उसके संरक्षण की जिम्मेदारी विनोद कुमार गोदियाल ने ली।
कार्यक्रम में समलौण संस्था के सेनानायक रणवीर सिंह रावत,संस्था के संस्थापक वीरेन्द्रदत्त गोदियाल,गजेंद्र सिंह रावत, श्री सुनील कुमार गोदियाल,राकेश कुमार गोदिया तथा मंदिर के पुजारी अनिल कुमार गोदियाल उपस्थित रहे।
