देहरादून। उत्तराखंड नर्सिंग भर्ती परीक्षा को पुनः वर्षवार कराने की मांग को लेकर उत्तराखंड नर्सिंग एकता मंच का धरना-प्रदर्शन एकता विहार, सहस्त्रधारा रोड पर लगातार जारी है। विगत डेढ़ महीने से नर्सिंग प्रशिक्षित अभ्यर्थी भारी गर्मी और बरसात के बावजूद क्रमिक अनशन एवं धरने पर बैठे हुए हैं, लेकिन अब तक विभाग और सरकार की ओर से उनकी एक सूत्रीय मांग पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे बेरोजगार नर्सिंग प्रशिक्षितों में भारी रोष व्याप्त है।
नर्सिंग प्रशिक्षितों का कहना है कि लगभग बीस वर्षों के लंबे इंतजार के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। वर्ष 2024-25 में विभाग द्वारा कुछ नियुक्तियां वर्षवार प्रक्रिया के तहत की गई थीं, लेकिन अब शेष पदों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने लिखित परीक्षा आधारित भर्ती की विज्ञप्ति जारी कर दी है, जिसका वे घोर विरोध कर रहे हैं।
उनका कहना है कि इतने वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अब कई अभ्यर्थियों की आयु सीमा समाप्त होने की कगार पर है। यदि सरकार उन्हें वर्षवार भर्ती के माध्यम से अवसर नहीं देती है तो वे हमेशा के लिए बेरोजगार हो जाएंगे।
आंदोलनकारी प्रशिक्षितों का कहना है कि वे अनुभवी युवा हैं, जिन्होंने विभिन्न बड़े चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में कार्य किया है तथा उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक अनुभव प्राप्त है। इसके बावजूद सरकार लिखित परीक्षा के माध्यम से कम अनुभवी प्रशिक्षितों को भर्ती करने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और विभाग की मंशा स्पष्ट नहीं है तथा लिखित परीक्षा का आधार बनाकर कुछ विशेष हित साधने का प्रयास किया जा रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।
मंच का कहना है कि प्रदेश के उप स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में लगभग 4007 पद रिक्त पड़े हैं, जिनका प्रस्ताव शासन स्तर पर पहले से उपलब्ध है। इसके बावजूद विभाग भर्ती प्रक्रिया को सरल और न्यायसंगत बनाने के बजाय लिखित परीक्षा लागू कर बेरोजगार प्रशिक्षितों के भविष्य के साथ अन्याय कर रहा है।
प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने बताया कि पिछले छह-सात महीनों से वे प्रदेश के वर्तमान विधायकों एवं मंत्रियों से लगातार मिल रहे हैं तथा उनके समर्थन पत्र स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद शासन स्तर से सरकार को गुमराह किया जा रहा है और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि युवा प्रशिक्षकों के पास एम्स, मिलिट्री हॉस्पिटल, पैरामिलिट्री फोर्स एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में रोजगार के विकल्प मौजूद हैं, लेकिन सबसे अधिक चिंता उन उम्रदराज प्रशिक्षितों की है, जिनके सामने पारिवारिक जिम्मेदारियां और गंभीर आर्थिक संकट खड़ा है। सरकार का रवैया ऐसे प्रशिक्षितों के प्रति बेहद लापरवाह दिखाई दे रहा है।
नर्सिंग एकता मंच ने आरोप लगाया कि सरकार उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है। लगभग डेढ़-दो महीने से प्रशिक्षित अपने परिवार और बच्चों को छोड़कर आंदोलनरत हैं, लेकिन अब तक सरकार या विभाग का कोई भी जिम्मेदार प्रतिनिधि उनकी समस्याएं सुनने धरना स्थल तक नहीं पहुंचा।
नर्सिंग एकता मंच ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक वर्षवार भर्ती के माध्यम से उनका हक नहीं दिया जाएगा, तब तक आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
