देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से तीनों प्रकरणों में तत्काल निर्णय लेते हुए विवादित आदेशों को निरस्त करने और संबंधित संपत्तियों को उनके मूल विभागों को वापस सौंपने की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ये तीनों मामले प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण से सीधे जुड़े हैं। सरकार की चुप्पी और कार्रवाई में लगातार हो रही देरी से यह संदेश जा रहा है कि सत्ता में बैठे प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि आम नागरिकों और बेरोजगार युवाओं को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए मांग की कि ज्ञापन प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर तीनों विवादित निर्णय निरस्त किए जाएं तथा संबंधित जमीनों और संपत्तियों को उनके मूल विभागों को वापस लौटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस ने कहा कि यदि निर्धारित अवधि में सरकार ने अपने निर्णय वापस नहीं लिए और संपत्तियां विभागों को नहीं लौटाईं तो प्रदेश की जनता की संपत्ति और अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होगी।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट एवं फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत सहित अन्य कांग्रेस नेता शामिल रहे।
