देहरादून। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा लागू किए गए सख्त नकल विरोधी कानून की सराहना करते हुए इसे युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड ने इतना कड़ा नकल विरोधी कानून बनाया है कि अदालतों को अब नकलखोरों, नकल कराने वालों और पेपर लीक करने वालों को सजा दिलाने में कोई समस्या नहीं होती।
राज्योत्सव समारोह में अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य का भविष्य उसकी युवा शक्ति पर निर्भर करता है। युवाओं को योग्यता और मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। भर्ती परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसी गतिविधियां मेहनती तथा प्रतिभाशाली युवाओं के अधिकारों पर चोट करती हैं। ऐसे अपराधों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने नकल माफिया और परीक्षा में अनियमितता करने वालों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए हैं। कड़े कानून के कारण नकल कराने वाले गिरोहों, पेपर लीक में शामिल लोगों और परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाले तत्वों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई का रास्ता प्रशस्त हुआ है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने इस कानून को युवाओं के हित में राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का उदाहरण बताते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने उत्तराखण्ड के इस प्रयास को सराहनीय बताते हुए कहा कि कानून का सख्ती से पालन होने से नकल और पेपर लीक जैसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है।
अमित शाह के इस बयान को उत्तराखण्ड में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की महत्वपूर्ण सराहना के रूप में देखा जा रहा है।
