देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईआरडीटी सभागार, सर्वे चौक में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी एवं जननायक स्व. रणजीत सिंह वर्मा के जीवन और संघर्ष पर आधारित पुस्तक ‘रणजीत सिंह वर्मा : उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन की निर्णायक लड़ाई के एक जननायक’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्व. वर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पृथक उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलन में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण दशकों के संघर्ष, आंदोलनकारियों के त्याग, तपस्या और बलिदान का परिणाम है। स्व. रणजीत सिंह वर्मा ने पृथक राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाने, विभिन्न संगठनों और आंदोलनकारियों को एकजुट करने तथा आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष के रूप में उन्होंने आंदोलन को संगठित नेतृत्व प्रदान किया। वर्ष 1995-96 और उसके बाद भी उन्होंने बंद, चक्का जाम, जेल भरो तथा रेल रोको जैसे आंदोलनों का नेतृत्व कर पृथक राज्य की मांग को मजबूती दी।
मुख्यमंत्री ने पुस्तक के माध्यम से स्व. वर्मा के जीवन, संघर्ष और योगदान को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी एवं अजय वर्मा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक जननायक की जीवनगाथा नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के संघर्ष, संकल्प और आंदोलनकारियों के त्याग एवं बलिदान का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज है।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुरूप विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का निर्माण करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाने, सुशासन को मजबूत करने तथा प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने राज्य आंदोलन के सभी शहीदों को नमन करते हुए आंदोलनकारियों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, हंस फाउंडेशन की संस्थापक माता मंगला, वरिष्ठ साहित्यकार गंभीर सिंह पालनी, अजय वर्मा सहित राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
