देहरादून। युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करने और मादक पदार्थों के सेवन की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने शिक्षण संस्थानों में नशामुक्ति जागरूकता गतिविधियों को और प्रभावी बनाने की पहल की है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जनपद के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी शासकीय एवं अशासकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नशामुक्ति विषय पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए केवल जागरूकता कार्यक्रम ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिए कि 18 अक्टूबर तक सभी विद्यार्थियों को शत-प्रतिशत ई-शपथ दिलाई जाए तथा निर्धारित एसओपी के अनुरूप प्रत्येक शिक्षण संस्थान में एंटी ड्रग्स कैंपस कमेटी का गठन किया जाए। साथ ही कैंपस में नियमित रूप से नशामुक्ति कार्यशालाएं आयोजित कर विद्यार्थियों को मादक पदार्थों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों की वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।
जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों को नशे से बचाव, परामर्श और सहायता के लिए उपलब्ध संसाधनों की जानकारी भी दी जाए। उन्होंने एंटी ड्रग्स गतिविधियों को पाठ्यक्रम एवं नियमित शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ने तथा मानस हेल्पलाइन-1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण, सकारात्मक सोच और बेहतर भविष्य की नींव तैयार करने वाले महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इसलिए नशामुक्त समाज के निर्माण में शिक्षण संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी संस्थानों से नशामुक्ति कार्यशालाओं को प्रभावी, व्यवहारिक एवं परिणामोन्मुख बनाने तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने की अपेक्षा की।
बैठक में प्राचार्यों ने नशामुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने के संबंध में अपने सुझाव भी दिए।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, एसडीएम रविन्द्र ज्वांठा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. दीपा मेहरा रावत, नोडल अधिकारी रंजना सैनी, सीआईएमएस ग्रुप के अध्यक्ष एडवोकेट ललित मोहन जोशी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।