देहरादून। जनपद में ऋण एवं ऋण बीमा से संबंधित बढ़ती फर्जीवाड़े की शिकायतों को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने गंभीरता से लेते हुए एनबीएफसी एवं एचएफसी प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर ऋण वितरण, एजेंटों की भूमिका, रिकवरी और संदिग्ध मामलों की समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आमजन की आर्थिक मजबूरी का लाभ उठाकर फर्जी तरीके से ऋण दिलाने, अनावश्यक दस्तावेज तैयार करने अथवा एजेंटों के माध्यम से धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लीड बैंक मैनेजर को संबंधित विभागों एवं वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए समिति गठित करने के निर्देश दिए, जो ऋण फर्जीवाड़े, संदिग्ध प्रकरणों और एजेंटों की गतिविधियों की नियमित निगरानी करेगी। प्रत्येक माह समीक्षा बैठक भी आयोजित की जाएगी।
डॉ. चौहान ने कहा कि गंभीर मामलों की आवश्यकता पड़ने पर एसआईटी से जांच कराई जाएगी। किसी बैंक, वित्तीय संस्था, एजेंट या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने वित्तीय संस्थाओं को ऋण वितरण में पारदर्शिता और आवेदकों की वास्तविक पुनर्भुगतान क्षमता का समुचित परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने सभी एनबीएफसी एवं एचएफसी से वितरित ऋणों और लंबित रिकवरी मामलों की विस्तृत सूची उपलब्ध कराने को कहा। वहीं, सभी उप जिलाधिकारियों को अपने क्षेत्रों में टास्क फोर्स गठित कर एनबीएफसी, एचएफसी, मनीलेंडरों और ऋण दिलाने वाले एजेंटों का विवरण संकलित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ऋण दिलाने के नाम पर आमजन को ठगने वाले फर्जी एजेंटों एवं एजेंसियों के पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर ध्वस्त किया जाएगा। जिला प्रशासन आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में किसी भी दोषी को बख्शेगा नहीं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, एसडीएम मुख्यालय रविन्द्र ज्वांठा, लीड बैंक प्रबंधक राजीव भाटिया, आरबीआई प्रतिनिधि भरत कुमार सहित विभिन्न एनबीएफसी एवं एचएफसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।