देहरादून, 30 मई। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के स्थापना दिवस के अवसर पर देहरादून स्थित सीटू कार्यालय में संगठन का ध्वजारोहण किया गया तथा श्रमिकों की विभिन्न मांगों के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई। संगठन ने बताया कि यह अभियान मजदूरों के बीच जाकर व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा और श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए संघर्ष के लिए संगठित किया जाएगा।
कार्यक्रम में सीटू के जिला अध्यक्ष एस.एस. नेगी ने संगठन का ध्वज फहराया। इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने कहा कि संगठन के मांगपत्र में श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने, श्रम कानूनों को बहाल करने तथा श्रमिक हितों की रक्षा करने की प्रमुख मांगें शामिल हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में 20 नवंबर 2025 से वेतन भुगतान अधिनियम, ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम और बोनस भुगतान अधिनियम प्रभावी रूप से लागू नहीं हैं, जिससे श्रमिकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों का लाभ उठाकर श्रमिकों के शोषण की आशंका बढ़ी है, जिसका सीटू पुरजोर विरोध करती है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि श्रम विभाग के अधिकारों में कटौती की गई है, जिससे श्रमिकों की समस्याओं के समाधान में कठिनाई उत्पन्न हो रही है।
सभा में वक्ताओं ने निर्माणाधीन लखवाड़-व्यासी जलविद्युत परियोजना में कार्यरत एल एंड टी कंपनी पर श्रमिकों के शोषण और उत्पीड़न के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि परियोजना में कार्यरत श्रमिकों को केंद्र सरकार के प्रावधानों के अनुसार मिलने वाला टनल अलाउंस नहीं दिया जा रहा है। साथ ही श्रम विभाग पर भी श्रमिकों की समस्याओं के समाधान में प्रभावी भूमिका न निभाने का आरोप लगाया गया।
सीटू नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों का शोषण बंद नहीं किया गया और उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू करेगा।
कार्यक्रम में सीटू के उपाध्यक्ष भगवंत पायल, कृष्ण गुनियाल, रवींद्र नौडियाल, दयाकिशन पाठक, हिमांशु चौहान, सोनू कुमार, नरेंद्र सिंह, शिवा दुबे, रजनी गुलेरिया, मोनिका, प्रेमा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
