देहरादून। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेशवासियों एवं देश-विदेश के पर्यटकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन द्वारा विश्व पर्यटन दिवस की थीम “डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पर्यटन का नव-निर्माण” निर्धारित किया गया है। उत्तराखंड भी पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बेहतर उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में होम स्टे योजना पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। वर्तमान में राज्य में 6,000 से अधिक पंजीकृत होम स्टे संचालित हो रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीण समुदायों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं तथा पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है।
महाराज ने बताया कि प्रदेश के 100 ट्रैकिंग मार्गों की जीपीएस और जीआईएस मैपिंग के लिए टीमों को भेजा गया है। इनमें 50 मार्ग गढ़वाल और 50 मार्ग कुमाऊं क्षेत्र के हैं। इन मार्गों के आधार पर एक मोबाइल ट्रैकिंग नेविगेशन ऐप तथा “द ट्रैक्स ऑफ उत्तराखंड” कॉफी टेबल बुक तैयार की जाएगी। इससे ट्रैकिंग मार्गों की सटीक जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे ट्रैकिंग अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित होने के साथ ही उत्तराखंड के ट्रैक देश-विदेश के ट्रेकर्स तक पहुंच सकेंगे।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि साहसिक पर्यटन आज उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान बन रहा है। 24 से 26 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली आदि कैलाश परिक्रमा-2.0 आदि कैलाश एवं ॐ पर्वत क्षेत्र की प्राकृतिक और आध्यात्मिक भव्यता को नई पहचान देगी। आदि कैलाश परिक्रमा रन तथा नीति वैली अल्ट्रा जैसे उच्च हिमालयी आयोजनों ने यह साबित किया है कि उत्तराखंड के सीमांत गांवों को भी विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे सीमांत क्षेत्रों के स्थानीय समुदायों को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा। नवंबर 2026 में प्रस्तावित हिमालयन कार रैली भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को बारहमासी पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। शीतकालीन चारधाम यात्रा, स्नो ट्रैकिंग, एस्ट्रो टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन जैसी गतिविधियां विभिन्न मौसमों में पर्यटकों को उत्तराखंड की ओर आकर्षित कर रही हैं। नवंबर माह में उत्तराखंड एकता नगर में भारत पर्व तथा लंदन में वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड की पर्यटन संभावनाओं और संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाया जाएगा।
महाराज ने कहा कि उत्तराखंड को “भारत की आध्यात्मिक राजधानी” के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से विभिन्न आध्यात्मिक एवं धार्मिक सर्किटों के विकास का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत शाक्त, शैव, वैष्णव, विवेकानंद, नरसिंह, गोल्ज्यू, गुरुद्वारा, नवग्रह, नागराजा, हनुमान और महासू देवता सर्किटों को विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक विरासत, साहसिक पर्यटन और समृद्ध लोक संस्कृति को आधुनिक तकनीक से जोड़कर प्रदेश को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाया जा रहा है।
