देहरादून। महिलाओं की समस्याओं की सुनवाई, उनके अधिकारों की रक्षा तथा महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को पुलिस लाइन सभागार, देहरादून में ‘राष्ट्रीय महिला आयोग, आपके द्वार’ अभियान के अंतर्गत महिला जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में आयोजित इस जनसुनवाई में 25 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें अधिकांश मामले घरेलू हिंसा एवं महिला उत्पीड़न से संबंधित थे।
जनसुनवाई के दौरान आयोग की अध्यक्ष ने पीड़ित महिलाओं की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने पुलिस तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रत्येक मामले में तथ्यों के आधार पर प्रभावी कार्रवाई करने, पीड़ित महिलाओं को आवश्यक सुरक्षा एवं सहायता उपलब्ध कराने तथा उन्हें न्याय दिलाने के लिए समयबद्ध प्रयास करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि महिलाओं के प्रति हिंसा, भेदभाव एवं उत्पीड़न किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। प्रत्येक महिला को समाज में सम्मान, समानता और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। आज महिलाएं परिवार से लेकर प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान और सामाजिक क्षेत्र तक अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में समाज को महिलाओं के प्रति अपनी सोच में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है। महिलाओं को नीचा दिखाना, उनके साथ भेदभाव करना अथवा उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करना सामाजिक रूप से अनुचित है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक महिला सशक्तिकरण के लिए केवल अधिकारों की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना और उनकी शिकायतों पर संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करना भी आवश्यक है। महिला उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता की बात को गंभीरता से सुनना और उसे न्याय दिलाने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं का समन्वित प्रयास जरूरी है।
अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, सहायता और संरक्षण के लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबर एवं सहायता तंत्र संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में अनेक महिलाएं इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाती हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा, दुर्व्यवहार अथवा उत्पीड़न की स्थिति में चुप न रहें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहते हुए उपलब्ध सहायता सेवाओं का उपयोग करें।
उन्होंने बताया कि आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए 112, महिला हेल्पलाइन के लिए 181 तथा राष्ट्रीय महिला आयोग की काउंसलिंग हेल्पलाइन 14490 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त महिला सुरक्षा हेल्पलाइन 1091, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 तथा राष्ट्रीय महिला आयोग की 24×7 हेल्पलाइन 7827170170 के माध्यम से भी सहायता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने विशेष रूप से काउंसलिंग हेल्पलाइन की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से उन महिलाओं को भी परामर्श एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है, जो अपने साथ हुए दुर्व्यवहार अथवा उत्पीड़न के बारे में खुलकर बात नहीं कर पाती हैं।
जनसुनवाई के दौरान महिलाओं की सुरक्षा के लिए संचालित विभिन्न मोबाइल ऐप की जानकारी भी दी गई। वन स्टॉप सेंटर ऐप के माध्यम से हिंसा से प्रभावित महिलाओं को उपलब्ध सुरक्षा, संरक्षण एवं सहायता सेवाओं की जानकारी दी जाती है। वहीं 112 ऐप आपातकालीन परिस्थितियों में 24 घंटे पुलिस एवं अन्य आवश्यक सहायता प्राप्त करने का माध्यम है। रक्षा ऐप के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि आपात स्थिति में एक बटन दबाकर महिला अपनी लोकेशन परिजनों एवं करीबी लोगों के साथ साझा कर सकती है, जिससे समय रहते सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिल सके।
विजया रहाटकर ने कहा कि महिलाओं को अपने कानूनी अधिकारों, उपलब्ध संरक्षण संबंधी प्रावधानों और सहायता सेवाओं की जानकारी होना बेहद जरूरी है। महिला उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने तथा पीड़िताओं को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी केवल पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रत्येक संबंधित संस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि महिलाओं से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण संवेदनशीलता, गंभीरता और जवाबदेही के साथ किया जाए।
कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, पुलिस महानिरीक्षक निलेश भरणे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेन्द्र डोभाल, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण जया बलूनी, बाल कल्याण समिति एवं वन स्टॉप सेंटर की अधीक्षिकाओं सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
