हरिद्वार। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता के पावन आशीर्वाद से बीएचईएल सेक्टर-1 स्थित सामुदायिक केंद्र में जोन स्तरीय निरंकारी महिला संत समागम का भव्य आयोजन किया गया। समागम में जोन की विभिन्न शाखाओं से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बहनों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीत, कविताओं, नाटकों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मानवता, प्रेम, सेवा, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर बहन रश्मि राघव ने सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज के संदेश को साध संगत तक पहुंचाते हुए कहा कि प्रेमाभक्ति जीवन की श्रेष्ठ अवस्था है। सच्ची भक्ति से मनुष्य के जीवन में दया, करुणा, प्रेम, नम्रता, मिलवर्तन और भाईचारे जैसे दिव्य गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि परमात्मा की अनुभूति और उसके प्रति समर्पण का भाव है।
उन्होंने शबरी जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए नवधा भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सेवा, सुमिरन और सत्संग के माध्यम से भक्ति के दिव्य गुण जीवन में सहज रूप से विकसित होते हैं। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से मनुष्य कण-कण में परमात्मा की उपस्थिति का अनुभव कर जीवन में स्थायी आनंद, विश्वास और समर्पण प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान का प्रभाव व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और समाज में भी प्रेम, सद्भाव और अच्छे संस्कारों का वातावरण निर्मित करता है।
समागम के समापन पर मसूरी जोन के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह ने सभी श्रद्धालु भक्तों एवं सेवादारों का हृदय से आभार व्यक्त किया और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग के लिए सभी का धन्यवाद किया।
