देहरादून, 9 मार्च। उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तुत बजट को दिशाहीन, प्रतिगामी, विकास विरोधी तथा महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाने वाला चुनावी बजट करार दिया है।
बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गोदियाल ने कहा कि धामी सरकार का यह बजट केवल चुनावी वर्ष में की गई घोषणाओं का पुलिंदा है, जिसमें प्रदेश की जनता की मूल समस्याओं के समाधान की कोई स्पष्ट झलक नहीं दिखाई देती। प्रदेश में लगातार बढ़ती बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है, लेकिन बजट में युवाओं को स्थायी रोजगार देने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में पलायन एक गंभीर समस्या है, लेकिन इसे रोकने के लिए बजट में कोई प्रभावी रणनीति नहीं दिखाई देती।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है। पर्वतीय क्षेत्रों में अस्पतालों में डॉक्टरों और आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है, फिर भी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं।शिक्षा व्यवस्था में सुधार, सरकारी विद्यालयों को सुदृढ़ करने और शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए भी बजट में ठोस कदमों का अभाव है। किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कोई बड़ी योजना बजट में शामिल नहीं की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई से जूझ रही आम जनता को राहत देने के लिए भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उद्योग, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी बजट में कोई प्रभावी पहल नहीं दिखाई देती।सदन में प्रस्तुत बजट राज्य के समग्र विकास की दिशा में ठोस कदम उठाने के बजाय केवल चुनावी घोषणाओं तक सीमित नजर आता है। उन्होंने इसे महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाने वाला तथा राज्य की आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचाने वाला बजट बताया।
गोदियाल ने कहा कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बजट में केवल कोरी घोषणाएं की गई हैं, लेकिन उनके लिए धन कहां से आएगा इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाओं के नाम बदलकर “नई बोतल में पुरानी शराब” वाला फार्मूला अपनाया गया है और बजट में कोई नई पहल नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बजट में गरीब, महिला, बेरोजगार और किसानों का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन महंगाई, महिला सुरक्षा, रोजगार और पलायन रोकने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किए गए हैं। रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने के दावे किए गए हैं, लेकिन किसानों के लिए बजट में कोई वास्तविक प्रावधान नहीं है।सरकार द्वारा बजट में संतुलन की बात केवल कल्पना मात्र है और सभी क्षेत्रों में यह बजट निराशाजनक साबित हुआ है। हर वर्ष की तरह बजट का आकार तो बढ़ाया गया है, लेकिन आय के नए स्रोतों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि गांव, गरीब, दलित और कमजोर वर्गों को लाभ पहुंचाने वाले विभागों—जैसे कृषि, समाज कल्याण, एससीपी, एसटीपी, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली और पानी—के बजट में केवल आंकड़ों की जादूगरी की गई है।पहले खोले गए अटल आदर्श विद्यालयों की स्थिति दयनीय बनी हुई है और पर्वतीय व ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रविहीन विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए भी बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं है।
राज्य की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताते हुए गोदियाल ने कहा कि जब 2017 में कांग्रेस ने सत्ता छोड़ी थी तब राज्य पर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कर्ज लेकर घी पीने का काम कर रही है।
बजट सत्र की अवधि पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि धामी सरकार विपक्ष के सवालों से बचना चाहती है, इसलिए केवल चार दिन का सदन बुलाकर खानापूर्ति की गई है।
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में झूठी घोषणाओं और कर्ज पर निर्भरता की कहावत चरितार्थ होती नजर आती है।
