08
Apr
8 अप्रैल 1929 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक क्रांतिकारी मोड़ लेकर आया। इसी दिन दिल्ली स्थित केंद्रीय असेंबली भवन में भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त और विजय कुमार ने दर्शक दीर्घा से बम फेंककर ब्रिटिश हुकूमत को झकझोर दिया। यह बम किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं था—बल्कि "बहरों को सुनाने के लिए धमाका ज़रूरी है"—इस सोच के साथ किया गया था। बम धमाके के बाद उन्होंने नारे लगाए: "इंकलाब जिंदाबाद! साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!" और खुद को गिरफ्तारी के लिए सौंप दिया। यह साहसिक कदम उन्होंने दो दमनकारी विधेयकों के विरोध में उठाया था— पब्लिक सेफ्टी…
