देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती कार्यक्रम में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देवभूमि को अनेक सौगातें दीं। उन्होंने समारोह में 8140 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। ये परियोजनाएं पेयजल, सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, खेल और कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी हैं।
प्रधानमंत्री ने समारोह में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया और अपना संबोधन गढ़वाली भाषा में शुरू कर उपस्थित जनसमूह में उत्साह का संचार किया। उन्होंने कहा, “जहां चाह, वहां राह।” यदि हमें अपना लक्ष्य पता है, तो हम अवश्य आगे बढ़ते हैं। उत्तराखंड ने यह बात सिद्ध कर दिखाई है। उन्होंने कहा कि राज्य में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की बढ़ती मांग के साथ हर विधानसभा क्षेत्र में योग केंद्र और होमस्टे को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान बार-बार गढ़वाली भाषा में जनता से संवाद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और खेल से जुड़ी परियोजनाएं प्रदेश की विकास यात्रा को और आगे बढ़ाएंगी। साथ ही बताया कि राज्य सरकार अब सेब और कीवी के किसानों को डिजिटल अनुदान देने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड आध्यात्मिक जीवन की धड़कन है।”
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि राज्य का हर गांव वैक्सीन के दायरे में आ चुका है, जो विकास की अद्भुत यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने इसे सबको साथ लेकर चलने वाले हर उत्तराखंडी के संकल्प का परिणाम बताया। प्रधानमंत्री ने गढ़वाली में कहा, “2047 मा भारत तै विकसित देशों की लेन मा ल्ल्याण को मेरु उत्तराखंड मेरू देवभूमि पूरी तरह से तैयार छः।”
प्रधानमंत्री ने रजत जयंती पर लगी विशेष प्रदर्शनी को देखने की अपील करते हुए कहा कि इसमें उत्तराखंड की सफलता की गाथा दर्ज है। उन्होंने बताया कि 25 वर्ष पहले राज्य का बजट मात्र 4000 करोड़ रुपये था, जो आज एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। बिजली उत्पादन चार गुना बढ़ा है, सड़कों की लंबाई दोगुनी हुई है, और जहां छह माह में 4000 हवाई यात्री आते थे, आज प्रतिदिन 4000 से अधिक लोग हवाई मार्ग से आ रहे हैं। आज राज्य में 10 मेडिकल कॉलेज स्थापित हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनका उत्तराखंड से गहरा लगाव रहा है। “जब मैं यहां आता था तो लोगों की लगन और ललक मुझे प्रेरित करती थी। मुझे हमेशा विश्वास था कि यह दशक उत्तराखंड के उत्कर्ष का कालखंड बनेगा।” उन्होंने बताया कि राज्य निर्माण के शुरुआती वर्षों में संसाधन सीमित थे, बजट की कमी थी और केंद्र की मदद पर निर्भरता अधिक थी, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड जिस ऊंचाई पर पहुंचा है, उसे देखकर हर वह व्यक्ति गर्व महसूस कर रहा है जिसने राज्य निर्माण के लिए संघर्ष किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘डबल इंजन की सरकार’ प्रदेश की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने रजत जयंती पर राज्यवासियों को बधाई दी और उन सभी आंदोलनकारियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए जिन्होंने राज्य की स्थापना के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 9 नवंबर का यह दिन एक लंबी तपस्या का फल है और उत्तराखंड की देवतुल्य जनता के सपनों की पूर्ति का प्रतीक है, जो अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में 25 वर्ष पहले साकार हुआ था।
मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया और ऊखीमठ स्थित बाबा केदारनाथ के शीतकालीन प्रवासस्थल की प्रतिकृति उन्हें भेंट की। समारोह में प्रदेश के अनेक गणमान्य अतिथि, जनप्रतिनिधि और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
