देहरादून।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड आशा कार्यकर्त्री यूनियन (सीटू) के बैनर तले सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने आज राजधानी में जोरदार प्रदर्शन किया। सीटू कार्यालय, गांधी पार्क से निकला जुलूस राजपुर रोड, दिलाराम चौक होते हुए कैंट रोड, हाथीबड़कला पहुंचा, जहां पुलिस बैरिकेडिंग पर धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद जुलूस एक सभा में परिवर्तित हो गया, जहां आशा कार्यकर्ताओं ने धामी सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया और मुख्यमंत्री से शीघ्र वार्ता का आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
प्रदर्शन का नेतृत्व प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे ने किया, जबकि जिलाध्यक्ष सुनीता चौहान सहित सुनीता सेमवाल, सुनीता तिवारी, अनीता भट्ट, अनीता अग्रवाल, नीरू जैन, रजनी, शोभा, साक्षी, पुष्पा खंडूरी, सीमा, सरिता, रोशनी राणा कंडारी, नीरज, सुनीता पाल, रचना, राधा, राजकुमारी, कीर्ति, यशोदा, सरोज, ममता, पूनम, शीतल, संगीता, संगीता भंडारी, किरण, ललित, सीता, रीता, रविता, दीपा, बबीता, कविता, मेहरून, शबाना, गीता, कल्पेश्वरी, सर्वेश्वरी सहित सैकड़ों आशा कार्यकर्त्रियां इस प्रदर्शन में शामिल रहीं।
इसके अलावा, सीटू महामंत्री लेखराज, कोषाध्यक्ष रविंद्र नौडियाल, सचिव रामसिंह भंडारी, सीपीएम सचिव अनंत आकाश, हरीश कुमार, प्रेमा गढ़िया, सोनू, विनोद कुमार, गुरुप्रसाद आदि भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
आशा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी 10 सूत्रीय मांगें प्रस्तुत कीं।
- पिछले तीन वर्षों से केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा मासिक मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, इसे शीघ्र बढ़ाया जाए।
- वर्ष 2021 में 4000 रुपये मासिक बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, इसे तत्काल लागू किया जाए।
- अन्य राज्यों की भांति उत्तराखंड में भी आशा कार्यकर्ताओं के लिए सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त 5 लाख रुपये भुगतान की व्यवस्था की जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं को पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
- सभी आशा कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाया जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के समान दर्जा दिया जाए।
- कार्य के दौरान किसी आशा कार्यकर्ता की मृत्यु होने पर 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- 45वें और 46वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए।
- अस्पतालों में आशा कार्यकर्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
- विभिन्न भुगतानों में फैले भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाए और कमीशनखोरी पर रोक लगाई जाए।
आशा कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि सरकार इन मांगों पर त्वरित कार्रवाई कर उनकी समस्याओं का समाधान करेगी।
