पर्यावरण बचाओ आंदोलन 2.0 – विकास के नाम पर कटे और कटने वाले पेड़ों की निकाली अनोखी शव यात्रा

Share on Social Media

 

देहरादून। शहर में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के विरोध में एक बार फिर नागरिक एकजुट हुए और अपनी निराशा को व्यक्त करने के लिए अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। दून घाटी के घटते हरित आवरण को बचाने के लिए इस आंदोलन के तहत हजारों पेड़ों की कटाई पर गहरा शोक व्यक्त किया गया।

शव यात्रा में शामिल लोग सफेद कपड़े पहने हुए थे और उन्होंने मौन जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज किया। यह जुलूस परेड ग्राउंड स्थित अशोक स्तंभ से शुरू हुआ, जहां विभिन्न परियोजनाओं के लिए काटे गए पेड़ों को श्रद्धांजलि दी गई। राजीव गांधी स्टेडियम के पास स्थित ‘पेड़ों के कब्रिस्तान’ से मृत पेड़ों की टहनियों की अर्थी निकाली गई, जिसे महिलाओं ने कंधा दिया। मुंह पर काली पट्टी बांधे प्रदर्शनकारियों का यह गमगीन जुलूस परेड ग्राउंड से सचिवालय तक गया।

शव यात्रा के समापन पर ज्योत्सना, अजय शर्मा, विजय भट्ट और करण ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। इसके अलावा, MAD by BTD संगठन के सदस्यों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से इस विनाशकारी विकास नीति पर सवाल उठाए। देहरादून के विभिन्न सामाजिक समूहों के सदस्य और कई आम नागरिक इस प्रदर्शन में शामिल हुए।

इस आंदोलन के माध्यम से देहरादून के नागरिक प्रशासन और नीति-निर्माताओं से अपील करते हैं कि वे विकास के मौजूदा मॉडल पर पुनर्विचार करें। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई सिर्फ पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचा रही, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी अंधकार में धकेल रही है। यदि यही चलता रहा, तो हम अपनी ही ‘अर्थी’ तैयार कर रहे होंगे।

‘पेड़ों का कब्रिस्तान’ – उजड़ती प्रकृति की मूक गवाही
राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम के पास का इलाका, जिसे ‘पेड़ों का कब्रिस्तान’ कहा जाने लगा है, वहां सैकड़ों मृत पेड़ खड़े हैं। इन पेड़ों को दो साल पहले सहस्त्रधारा रोड से प्रत्यारोपित किया गया था, लेकिन उनमें से कोई भी जीवित नहीं बचा। यह साफ दर्शाता है कि केवल दिखावटी प्रयासों से पर्यावरण नहीं बचाया जा सकता, बल्कि इसके लिए ठोस नीतियों और ईमानदार प्रयासों की आवश्यकता है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *