देहरादून।आज लालपुल, पटेलनगर में सैकड़ों बस्तीवासियों ने “बस्ती बचाओ आंदोलन” के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि देहरादून की कच्ची बस्तियों को मालिकाना हक दिया जाए और एनजीटी के फैसले पर रोक लगाई जाए, जिससे लोगों को विस्थापित होने से बचाया जा सके।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि एलिवेटेड रोड परियोजना गैर-जरूरी है और इससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा। वक्ताओं ने कहा कि सरकार इस परियोजना के जरिए कॉर्पोरेट हितों की रक्षा कर रही है, जबकि बस्तीवासियों के पुनर्वास और उनके अधिकारों को अनदेखा कर रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एनजीटी केवल गरीबों की बस्तियों को हटाने का आदेश दे रहा है, जबकि बड़े लोगों की अवैध इमारतों और सरकारी कब्जों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
मुख्य मांगें:
- देहरादून की कच्ची बस्तियों को मालिकाना हक दिया जाए।
- एनजीटी के विस्थापन संबंधी फैसले पर रोक लगाई जाए।
- एलिवेटेड रोड परियोजना को रद्द कर शहर के पर्यावरण संरक्षण और समग्र विकास में धन लगाया जाए।
प्रदर्शन के बाद जुलूस न्यू पटेलनगर, चंद्रशेखर आज़ाद नगर कॉलोनी और सत्तोवाली घाटी तक निकाला गया। अंत में उपजिलाधिकारी सदर हरिगिरी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से अनंत आकाश, राजेंद्र पुरोहित, मोहम्मद अल्ताफ, इंदु नौडियाल, लेखराज, नुरैशा अंसारी, अदनान, बिंदा मिश्रा, किरण, सोनू, हरीश, शवनम, इंदु, माला, तमरेज, विप्लव, साबरा, सालेहा, ममता, हसीन, अंसारी, हामिद अंसारी, साजिद अंसारी, अल्ताफ अहमद, फिरदौस, यूसुफ, सैफी, शांता, सादिया, मीना देवी, इंतजार अली, नासिर, रुकसाना, अंचला, लतेश, सुनील, साजिद, फैजान, और बड़ी संख्या में अन्य प्रभावित लोग उपस्थित रहे।
