गढ़वाल राइफल्स की मानवीय परंपरा—विकलांग आश्रित तक पेंशन सहायता का अनुकरणीय उदाहरण

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देहरादून। गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट सेंटर एवं अभिलेख कार्यालय, लैंसडाउन से आए सुबेदार क्लर्क एस.एस. बोरा तथा उनके साथ सुबेदार मेजर विक्रम सिंह कण्डारी के द्वारा  पोस्ट ऑफिस रोड, क्लेमेनटाउन, देहरादून ग्राफिक एरा नं. 2 गेट के समीप 7वीं बटालियन गढ़वाल राइफल्स के नायक स्व. मंगल सिंह के विकलांग पुत्र नरेंद्र सिंह के नाम पेंशन (PPO) से संबंधित कागजात सुपुर्द किए गए।

नरेंद्र सिंह चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनकी तथा उनके परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। उनके घर तक पहुंचने के लिए भी विशेष मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे कठिन हालात में स्वयं पहुंचकर सहायता देना गढ़वाल राइफल्स की संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का जीवंत प्रमाण है।

इस अवसर पर कैप्टन आलम सिंह भण्डारी (अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, क्लेमेनटाउन देहरादून), हवलदार कैलाश एवं स्थानीय पड़ोसी उपस्थित रहे।कैप्टन आलम सिंह भण्डारी ने सेंटर कमांडेंट विनोद नेगी, कर्नल ऑफ द रेजीमेंट, स्काउट लेफ्टिनेंट जनरल दिनेश सिंह राणा, सी.आर.ओ. लेफ्टिनेंट कर्नल प्रताप सिंह, एस.आर.ओ. लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष, मेजर दिलबाग तथा सभी रैंकों का हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि स्वर्गीय पूर्व सैनिकों के विकलांग बच्चों और आश्रितों की इस प्रकार सुध लेना और उन्हें सहयोग प्रदान करना एक अनुकरणीय मिसाल है,जिसके लिए गढ़वाल राइफल्स को ग्रेट सैल्यूट।

गढ़वाल राइफल्स एक ऐसी संस्था है जो अपने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की निरंतर देखभाल करती है। गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट सेंटर न केवल रेजीमेंट के जवानों, बल्कि रिकॉर्डिंग के माध्यम से भी सैनिकों और उनके आश्रितों की समस्याओं का समाधान करता है।

एक बार फिर, रेजीमेंट सेंटर कमांडेंट जो दिन-रात सैनिक हितों के लिए समर्पित रहते हैं तथा कर्नल ऑफ द रेजीमेंट गढ़वाल राइफल्स एवं गढ़वाल स्काउट्स के मार्गदर्शन में पूरी रेजीमेंट के जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं का समाधान निरंतर होता रहता है।

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